महिलाओं के लिए शीर्ष स्वास्थ्य जाँच
१. रक्तचाप - महिलाओं में अधिक वजन या मोटापे की संभावना होती है। इससे उच्च रक्तचाप होने का खतरा बढ़ जाता है जिससे दिल का दौरा, स्ट्रोक और गुर्दे की बीमारी हो सकती है। इसलिए महिलाओं को अपना ब्लड प्रेशर नंबर पता होना चाहिए।
२. रक्त शर्करा परीक्षण (ब्लड ग्लूकोस टेस्ट) - जो महिलाएं अधिक वजन वाली या मोटापे से ग्रस्त हैं और जिनके पास मधुमेह का पारिवारिक इतिहास है, उनमें मधुमेह विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है। उन्हें समय-समय पर अपना रक्त शर्करा परीक्षण करवाना चाहिए और चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिए।
३. बॉडी मास इंडेक्स - बॉडी मास इंडेक्स आपकी ऊंचाई और वजन के आधार पर गणना है और यह आपके मोटापे के जोखिम को मापता है। स्वस्थ वजन को बनाए रखने के लिए सभी महिलाओं को अपनी संख्या जानना और अपनी जीवन शैली और आहार में बदलाव करना आवश्यक है।
४. बोन डेंसिटी स्क्रीनिंग - महिलाओं की बढ़ती उम्र में उनकी हड्डियां ऑस्टियोपोरोसिस के कारण कमजोर होने लगती हैं, जिससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। 65 साल की उम्र से सभी महिलाओं को ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे को जानने के लिए जांच करवानी चाहिए।
५. स्तन कैंसर का पता लगाना - स्तन कैंसर महिलाओं में होने वाला सामान्य कैंसर है। कुछ सामान्य लक्षण स्तन विषमता, खूनी निर्वहन, गांठ और त्वचा और निपल परिवर्तन हैं। सबसे अच्छा निदान परीक्षण मैमोग्राफी है जो 50 साल की उम्र में शुरू होता है, हर 2 साल में किया जाता है। यदि पारिवारिक इतिहास है, तो स्क्रीनिंग 30 साल की उम्र में शुरू हो सकती है।
६. पेट के कैंसर की जांच - कोलोरेक्टल कैंसर महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है। कुछ लक्षण वजन कम होना, स्टूल (मल) में रक्त, आंत्र की आदतों में परिवर्तन हैं। नैदानिक परीक्षण में स्टूल सैंपल जिसमे खून के होने की जांच शामिल है या कोलोनोस्कोपी का उपयोग किया जा सकता है जो बृहदान्त्र को देखने के लिए एक कैमरा का उपयोग करता है। स्टूल सैंपल टेस्ट हर साल और कोलोनोस्कोपी हर 5 साल में किया जाता है जिसकी शुरुआत 50 साल की उम्र से होती है। यदि कोई पारिवारिक इतिहास है, तो स्क्रीनिंग कम उम्र में शुरू हो सकती है
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७. दंत जांच - खराब दंत स्वास्थ्य विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है और महिलाओं में आत्मविश्वास कम कर सकता है। दांतों के क्षय के संकेतों की जांच के लिए नियमित जांच की सलाह दी जाती है।
८. लिपिड प्रोफाइल की जाँच - यह उपकरण हृदय रोग या स्ट्रोक के जोखिम का आकलन करने में मदद करता है। 40 वर्ष की आयु या मोटापे और मधुमेह जैसी स्थितियों वाली कोई भी महिला इस रक्त परीक्षण को करवा सकती है।
९. सर्वाइकल कैंसर की जाँच - पैप स्मीयर के दौरान, आपका डॉक्टर योनि नलिका को चौड़ा करने के लिए एक स्पेकुलम का उपयोग करता है, एक छोटे ब्रश के साथ गर्भाशय ग्रीवा से कोशिकाएं लेता है, और उन कोशिकाओं की जांच माइक्रोस्कोप के तहत उन परिवर्तनों के लिए करता है जो गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का कारण हो सकते हैं। स्क्रीनिंग 30 साल की उम्र में शुरू होनी चाहिए, अगर परीक्षण नकारात्मक है तो महिलाएं हर तीन से पांच साल में यह टेस्ट करवा सकती हैं। वैकल्पिक रूप से, एचपीवी परीक्षण का उपयोग ह्यूमनपैपिलोमावायरस (एच पी वी) का पता लगाने के लिए किया जा सकता है जो सबसे आम यौन संचारित संक्रमणों में से एक है जो लगातार होने पर कैंसर का कारण बन सकता है। इसकी जांच 30 साल की उम्र से शुरू होनी चाहिए और यदि टेस्ट निगेटिव है तो महिलाएं कम से कम पांच साल बाद टेस्ट करा सकती हैं।
१०. त्वचा की जांच - महिलाएं अपने पूरे शरीर की त्वचा का सावधानीपूर्वक निरीक्षण कर सकती हैं, किसी नए तिल (मोल्स) की तलाश कर सकती हैं या मौजूदा तिल में किसी भी तरह के बदलाव की जांच कर सकती हैं जो त्वचा कैंसर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। धूप से त्वचा के जलने से मेलेनोमा और अन्य त्वचा के कैंसर हो सकते हैं, इसलिए कड़ी धूप से बचाव सभी उम्र की महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है। यदि आप किसी तिल में किसी भी बदलाव को देखती हैं तो जल्द से जल्द अपने डॉक्टर की सलाह लें।
११. दृश्य और श्रवण (देखने और सुनने की क्षमता) परीक्षण - जैसे-जैसे महिलाओं की उम्र बढ़ती है, उनके सुनने और देखने की क्षमता में बदलाव आ सकता है। सड़क के निर्देशों को पढ़ना या भीड़ वाले रेस्तरां में बातचीत करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। आप डब्ल्यूएचओ (WHO) के एप्लिकेशन को डाउनलोड कर सकते हैं जिसपर निशुल्क अपने देखने और सुनने की क्षमता की जांच कर सकते हैं|

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